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mahabharat 7.191.8: राजेन्द्र! तत्पश्चात् आचार्य ने उस अस्त्र को रोकने का प्रयत्न किया, परंतु वह दिव्यास्त्र उस महात्मा के अन्तःकरण में पहले के समान प्रकट न हो सका॥8॥   |   mahabharat अध्याय 7.191: द्रोणाचार्य और धृष्टद्युम्नका युद्ध तथा सात्यकिकी शूरवीरता और प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 191: द्रोणाचार्य और धृष्टद्युम्नका युद्ध तथा सात्यकिकी शूरवीरता और प्रशंसा  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.191.8 
तत: प्रयत्नमातिष्ठदाचार्यस्तस्य वारणे।
न चास्यास्त्राणि राजेन्द्र प्रादुरासन्महात्मन:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! तत्पश्चात् आचार्य ने उस अस्त्र को रोकने का प्रयत्न किया, परंतु वह दिव्यास्त्र उस महात्मा के अन्तःकरण में पहले के समान प्रकट न हो सका॥8॥
 
Rajendra! Thereafter, Acharya tried to stop that weapon, but that divine weapon could not appear in the conscience of that Mahatma as before. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)