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mahabharat 7.191.6: धृष्टद्युम्न के हाथ में प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी धनुष देखकर सभी सैनिक सोचने लगे कि 'मेरा अन्त आ गया है।'   |   mahabharat अध्याय 7.191: द्रोणाचार्य और धृष्टद्युम्नका युद्ध तथा सात्यकिकी शूरवीरता और प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.191.6 
पार्षतेन परामृष्टं ज्वलन्तमिव तद् धनु:।
अन्तकालमनुप्राप्तं मेनिरे वीक्ष्य सैनिका:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
धृष्टद्युम्न के हाथ में प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी धनुष देखकर सभी सैनिक सोचने लगे कि 'मेरा अन्त आ गया है।'
 
Seeing the blazing fire-like bright bow in the hands of Dhrishtadyumna, all the soldiers began to think that 'my end has come.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)