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mahabharat 7.191.33: प्रजानाथ! धृष्टद्युम्न के वे घोड़े मारे गए और पृथ्वी पर गिर पड़े और लाल रंग के घोड़े रथ के बंधन से मुक्त हो गए॥33॥   |   mahabharat अध्याय 7.191: द्रोणाचार्य और धृष्टद्युम्नका युद्ध तथा सात्यकिकी शूरवीरता और प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.191.33 
ते हता न्यपतन् भूमौ धृष्टद्युम्नस्य वाजिन:।
शोणास्तु पर्यमुच्यन्त रथबन्धाद् विशाम्पते॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! धृष्टद्युम्न के वे घोड़े मारे गए और पृथ्वी पर गिर पड़े और लाल रंग के घोड़े रथ के बंधन से मुक्त हो गए॥33॥
 
Prajanath! Those horses of Dhrishtadyumna were killed and fell on the earth and the red colored horses were freed from the bondage of the chariot. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)