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mahabharat 7.191.28: तत्पश्चात् महारथी धृष्टद्युम्न ने पापकर्म की इच्छा से उस रणभूमि में आचार्य द्रोण की छाती में तलवार भोंकने का विचार किया ॥28॥   |   mahabharat अध्याय 7.191: द्रोणाचार्य और धृष्टद्युम्नका युद्ध तथा सात्यकिकी शूरवीरता और प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 191: द्रोणाचार्य और धृष्टद्युम्नका युद्ध तथा सात्यकिकी शूरवीरता और प्रशंसा  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.191.28 
चिकीर्षुर्दुष्करं कर्म धृष्टद्युम्नो महारथ:।
इयेष वक्षो भेत्तुं स भारद्वाजस्य संयुगे॥ २८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महारथी धृष्टद्युम्न ने पापकर्म की इच्छा से उस रणभूमि में आचार्य द्रोण की छाती में तलवार भोंकने का विचार किया ॥28॥
 
After that, the great charioteer Dhrishtadyumna, desiring to do evil deeds, thought of thrusting a sword into the chest of Acharya Drona in that battlefield. 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)