vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 189: धृष्टद्युम्नका दु:शासनको हराकर द्रोणाचार्यपर आक्रमण, नकुल-सहदेवद्वारा उनकी रक्षा, दुर्योधन तथा सात्यकिका संवाद तथा युद्ध, कर्ण और भीमसेनका संग्राम और अर्जुनका कौरवोंपर आक्रमण
»
श्लोक 38-39h
श्लोक
7.189.38-39h
सात्यकिं तु रणे राजन् प्रहसंस्तनयस्तव॥ ३८॥
आकर्णपूर्णैर्निशितैर्विव्याध त्रिंशता शरै:।
अनुवाद
राजन! तब आपके पुत्र ने मुस्कुराते हुए धनुष को कान तक खींचा और युद्धस्थल में सात्यकि पर तीस तीखे बाण चलाये।
King! Then smiling, your son drew his bow till the ear and shot thirty sharp arrows to Satyaki on the battlefield.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×