यदि रुद्रो द्विधाकृत्य युध्येतात्मानमात्मना।
तत्र शक्योपमा कर्तुमन्यत्र तु न विद्यते॥ ४४॥
अनुवाद
यदि भगवान शंकर अपने ही दो रूप बनाकर आपस में युद्ध करें तो उस युद्ध की तुलना उनसे की जा सकती है और दोनों में कोई तुलना नहीं है॥ 44॥
If Lord Shankar creates two forms of himself and fights with himself, then that very battle can be compared to them and there is no comparison between the two.॥ 44॥