श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 188: दु:शासन और सहदेवका, कर्ण और भीमसेनका तथा द्रोणाचार्य और अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.188.1 
संजय उवाच
ततो दु:शासन: क्रुद्ध: सहदेवमुपाद्रवत्।
रथवेगेन तीव्रेण कम्पयन्निव मेदिनीम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं: हे राजन! तत्पश्चात् दु:शासन ने क्रोधित होकर अपने रथ के महान वेग से पृथ्वी को कंपाते हुए सहदेव पर आक्रमण किया।
 
Sanjaya says: O King! Thereafter Dushasan infuriated himself and attacked Sahadeva, shaking the earth with the great speed of his chariot.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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