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तथा संसक्तयुद्धं तदभवद् भृशदारुणम्।
अथ संध्यागत: सूर्य: क्षणेन समपद्यत॥ ६०॥
अनुवाद
जब यह भीषण युद्ध चल रहा था, तो क्षण भर में सूर्यदेव पूर्णतः उदय हो गये।
While this fierce battle was going on, in a moment the Sun rose completely in the early morning dusk. 60.
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि द्रोणवधपर्वणि संकुलयुद्धे षडशीत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १८६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत द्रोणवधपर्वमें संकुलयुद्धविषयक एक सौ छियासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥