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mahabharat 7.186.52-53h: जब पिता-पुत्र शत्रुओं द्वारा मारे जाएँ, तब उस शत्रु की रक्षा कौन करेगा, विशेषतः राजाओं की सभा में शपथ लेने के बाद? ॥52 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  7.186.52-53h 
पितृपुत्रवधं प्राप्य पुमान् क: परिपालयेत्॥ ५२॥
विशेषतस्तु शपथं शपित्वा राजसंसदि।
 
 
अनुवाद
जब पिता-पुत्र शत्रुओं द्वारा मारे जाएँ, तब उस शत्रु की रक्षा कौन करेगा, विशेषतः राजाओं की सभा में शपथ लेने के बाद? ॥52 1/2॥
 
When a father and son are killed by the enemy, who will protect that enemy, especially after taking an oath in the assembly of kings? ॥ 52 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)