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mahabharat 7.186.34-35h: तत्पश्चात् भारद्वाजनंदन द्रोणाचार्य ने युद्ध में चेदि, केकय, सृंजय तथा मत्स्य देश के समस्त महारथियों को परास्त किया ॥34 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 186: पाण्डववीरोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, द्रुपदके पौत्रों तथा द्रुपद एवं विराट आदिका वध, धृष्टद्युम्नकी प्रतिज्ञा और दोनों दलोंमें घमासान युद्ध  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  7.186.34-35h 
ततो द्रोणोऽजयद् युद्धे चेदिकैकेयसृञ्जयान्॥ ३४॥
मत्स्यांश्चैवाजयत् कृत्स्नान् भारद्वाजो महारथान्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भारद्वाजनंदन द्रोणाचार्य ने युद्ध में चेदि, केकय, सृंजय तथा मत्स्य देश के समस्त महारथियों को परास्त किया ॥34 1/2॥
 
After that, Bhardwajnandan Dronacharya defeated Chedi, Kekaya, Srinjay and all the great charioteers of Matsya country in the war. 34 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)