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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 184: निद्रासे व्याकुल हुए उभयपक्षके सैनिकोंका अर्जुनके कहनेसे सो जाना और चन्द्रोदयके बाद पुन: उठकर युद्धमें लग जाना
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श्लोक 50
श्लोक
7.184.50
अरुणस्य तु तस्यानु जातरूपसमप्रभम्।
रश्मिजालं महच्चन्द्रो मन्दं मन्दमवासृजत्॥ ५०॥
अनुवाद
अरुण कांति के बाद चन्द्रदेव ने धीरे-धीरे सुवर्ण के समान प्रभाव वाला विशाल किरण-जाल फैलाना आरम्भ किया ॥50॥
After Arun Kanti, Chandradev gradually started spreading a huge ray-net with an effect like gold. 50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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