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mahabharat 7.184.37: प्रजानाथ! इस प्रकार आपके योद्धाओं में श्रेष्ठ अर्जुन की स्तुति करते हुए वह निद्रा के प्रभाव से चुप हो गया॥37॥   |   mahabharat अध्याय 7.184: निद्रासे व्याकुल हुए उभयपक्षके सैनिकोंका अर्जुनके कहनेसे सो जाना और चन्द्रोदयके बाद पुन: उठकर युद्धमें लग जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 184: निद्रासे व्याकुल हुए उभयपक्षके सैनिकोंका अर्जुनके कहनेसे सो जाना और चन्द्रोदयके बाद पुन: उठकर युद्धमें लग जाना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  7.184.37 
इति ते तं नरव्याघ्रं प्रशंसन्तो महारथा:।
निद्रया समवाक्षिप्तास्तूष्णीमासन् विशाम्पते॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! इस प्रकार आपके योद्धाओं में श्रेष्ठ अर्जुन की स्तुति करते हुए वह निद्रा के प्रभाव से चुप हो गया॥37॥
 
Prajanath! In this way, while praising Arjuna, the best of your warriors, he fell silent under the influence of sleep. 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)