श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 184: निद्रासे व्याकुल हुए उभयपक्षके सैनिकोंका अर्जुनके कहनेसे सो जाना और चन्द्रोदयके बाद पुन: उठकर युद्धमें लग जाना  »  श्लोक 26-27
 
 
श्लोक  7.184.26-27 
श्रान्ता भवन्तो निद्रान्धा: सर्व एव सवाहना:।
तमसा च वृते सैन्ये रजसा बहुलेन च॥ २६॥
ते यूयं यदि मन्यध्वमुपारमत सैनिका:।
निमीलयत चात्रैव रणभूमौ मुहूर्तकम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
सैनिकों! आप सभी अपने वाहनों सहित थके हुए हैं और नींद से अंधे हो रहे हैं। यहाँ पूरी सेना घने अंधकार और धूल से ढकी हुई है। इसलिए यदि आप उचित समझें तो युद्ध रोककर इस रणभूमि में कुछ घण्टों के लिए सो जाइए।'
 
‘Soldiers! All of you along with your vehicles are tired and are getting blinded by sleep. Here the entire army is covered with dense darkness and a lot of dust. Therefore, if you think it is right, then stop the war and sleep for a few hours on this battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)