Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.184.17-18h: उस समय वह अच्छी तरह से युद्ध करने में असमर्थ था, फिर भी अपनी लज्जा के कारण वह अपने धर्म पर दृष्टि रखते हुए अपनी सेना को छोड़कर नहीं जा सका। 17 1/2   |   mahabharat अध्याय 7.184: निद्रासे व्याकुल हुए उभयपक्षके सैनिकोंका अर्जुनके कहनेसे सो जाना और चन्द्रोदयके बाद पुन: उठकर युद्धमें लग जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 184: निद्रासे व्याकुल हुए उभयपक्षके सैनिकोंका अर्जुनके कहनेसे सो जाना और चन्द्रोदयके बाद पुन: उठकर युद्धमें लग जाना  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  7.184.17-18h 
ते तदापारयन्तश्च ह्रीमन्तश्च विशेषत:॥ १७॥
स्वधर्ममनुपश्यन्तो न जहु: स्वामनीकिनीम्।
 
 
अनुवाद
उस समय वह अच्छी तरह से युद्ध करने में असमर्थ था, फिर भी अपनी लज्जा के कारण वह अपने धर्म पर दृष्टि रखते हुए अपनी सेना को छोड़कर नहीं जा सका। 17 1/2
 
At that time he was unable to fight well, yet due to his shyness he could not leave his army while keeping his eyes on his Dharma. 17 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)