श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 184: निद्रासे व्याकुल हुए उभयपक्षके सैनिकोंका अर्जुनके कहनेसे सो जाना और चन्द्रोदयके बाद पुन: उठकर युद्धमें लग जाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.184.1 
संजय उवाच
व्यासेनैवमथोक्तस्तु धर्मराजो युधिष्ठिर:।
स्वयं कर्णवधाद् वीरो निवृत्तो भरतर्षभ॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- भरतश्रेष्ठ! व्यासजी की यह बात सुनकर वीर धर्मराज युधिष्ठिर ने स्वयं ही कर्ण को मारने का विचार त्याग दिया। 1॥
 
Sanjay says- Bharatshrestha! On hearing this from Vyasji, the brave Dharmaraja Yudhishthir himself withdrew from the idea of ​​killing Karna. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)