श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 182: कर्णने अर्जुनपर शक्ति क्यों नहीं छोड़ी, इसके उत्तरमें संजयका धृतराष्ट्रसे और श्रीकृष्णका सात्यकिसे रहस्ययुक्त कथन  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  7.182.45 
अत: प्रहर्ष: सुमहान् युयुधानाद्य मेऽभवत्।
मृतं प्रत्यागतमिव दृष्ट्वा पार्थं धनंजयम्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
युयुधान! इसीलिए आज मैं कुन्तीपुत्र अर्जुन को देखकर बहुत प्रसन्न हुआ, मानो कोई मरकर लौट आया हो॥45॥
 
Yuyudhaan! That is why I was very happy today on seeing Arjuna, the son of Kunti, just as if someone had returned after dying. ॥ 45॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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