श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 182: कर्णने अर्जुनपर शक्ति क्यों नहीं छोड़ी, इसके उत्तरमें संजयका धृतराष्ट्रसे और श्रीकृष्णका सात्यकिसे रहस्ययुक्त कथन  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  7.182.43 
न पिता न च मे माता न यूयं भ्रातरस्तथा।
न च प्राणास्तथा रक्ष्या यथा बीभत्सुराहवे॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
मेरे लिए युद्ध में अर्जुन की रक्षा मेरे पिता, माता, तुम जैसे भाइयों अथवा अपने प्राणों की रक्षा से भी अधिक महत्वपूर्ण है ॥ 43॥
 
To me, the protection of Arjun in the war is more important than the protection of my father, mother, brothers like you, or my own life. ॥ 43॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas