श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 182: कर्णने अर्जुनपर शक्ति क्यों नहीं छोड़ी, इसके उत्तरमें संजयका धृतराष्ट्रसे और श्रीकृष्णका सात्यकिसे रहस्ययुक्त कथन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.182.16 
स विशेषात् त्वमोघाया: कृष्णोऽरक्षत पाण्डवम्।
हन्यात् क्षिप्रं हि कौन्तेयं शक्तिर्वृक्षमिवाशनि:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण ने उस अमोघ शक्ति से पाण्डुपुत्र अर्जुन की रक्षा के लिए विशेष प्रयत्न किया, अन्यथा वह शक्ति कुन्तीकुमार अर्जुन को उसी प्रकार शीघ्र ही नष्ट कर देती, जैसे वज्र गिरकर वृक्ष को नष्ट कर देता है ॥16॥
 
Shri Krishna made special efforts to protect Pandu's son Arjun from that infallible power, otherwise that power would have quickly destroyed Kuntikumar Arjun, just as a thunderbolt falls and destroys a tree. 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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