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mahabharat 7.181.32-33h: शत्रु सेना में इस भयंकर गर्जना का शब्द बढ़ता जा रहा है, और आपके सैनिक दसों दिशाओं में भाग रहे हैं ॥32 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.181: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको जरासंध आदि धर्मद्रोहियोंके वध करनेका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 181: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको जरासंध आदि धर्मद्रोहियोंके वध करनेका कारण बताना  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  7.181.32-33h 
वर्धते तुमुलस्त्वेष शब्द: परचमूं प्रति॥ ३२॥
विद्रवन्ति च सैन्यानि त्वदीयानि दिशो दश।
 
 
अनुवाद
शत्रु सेना में इस भयंकर गर्जना का शब्द बढ़ता जा रहा है, और आपके सैनिक दसों दिशाओं में भाग रहे हैं ॥32 1/2॥
 
The sound of this terrifying roar is increasing in the enemy's army, and your soldiers are fleeing in all ten directions. ॥ 32 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)