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mahabharat 7.181.29-30h: मैंने धर्म की स्थापना के लिए यह दृढ़ प्रतिज्ञा की है। मैं सत्य की शपथ लेकर आपसे कहता हूँ कि जहाँ वेद, सत्य, संयम, शौच, धर्म, शील, समृद्धि, धैर्य और क्षमा होगी, वहाँ मैं सदैव सुखपूर्वक रहूँगा।   |   mahabharat अध्याय 7.181: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको जरासंध आदि धर्मद्रोहियोंके वध करनेका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 181: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको जरासंध आदि धर्मद्रोहियोंके वध करनेका कारण बताना  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  7.181.29-30h 
धर्मसंस्थापनार्थं हि प्रतिज्ञैषा ममाव्यया।
ब्रह्म सत्यं दम: शौचं धर्मो ह्री: श्रीर्धृति: क्षमा॥ २९॥
यत्र तत्र रमे नित्यमहं सत्येन ते शपे।
 
 
अनुवाद
मैंने धर्म की स्थापना के लिए यह दृढ़ प्रतिज्ञा की है। मैं सत्य की शपथ लेकर आपसे कहता हूँ कि जहाँ वेद, सत्य, संयम, शौच, धर्म, शील, समृद्धि, धैर्य और क्षमा होगी, वहाँ मैं सदैव सुखपूर्वक रहूँगा।
 
I have made this firm vow to establish Dharma. I swear to you in the name of truth that I will always live happily wherever there is Veda, truth, self-control, cleanliness, Dharma, modesty, prosperity, fortitude and forgiveness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)