Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.181.26-27: मैंने उसे पहले नहीं मारा, क्योंकि मैं तुम्हें प्रसन्न करना चाहता था। वह एक पापी राक्षस था, जो ब्राह्मणों और यज्ञों से घृणा करता था और जिसने धर्म का परित्याग कर दिया था; इसीलिए मैंने उसे मरवा दिया। | mahabharat अध्याय 7.181: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको जरासंध आदि धर्मद्रोहियोंके वध करनेका कारण बताना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मया न निहत: पूर्वमेष युष्मत्प्रियेप्सया॥ २६॥
एष हि ब्राह्मणद्वेषी यज्ञद्वेषी च राक्षस:।
धर्मस्य लोप्ता पापात्मा तस्मादेष निपातित:॥ २७॥
अनुवाद
मैंने उसे पहले नहीं मारा, क्योंकि मैं तुम्हें प्रसन्न करना चाहता था। वह एक पापी राक्षस था, जो ब्राह्मणों और यज्ञों से घृणा करता था और जिसने धर्म का परित्याग कर दिया था; इसीलिए मैंने उसे मरवा दिया।
It was only because I wanted to please you that I did not kill him earlier. He was a sinful demon who hated Brahmins and sacrifices and who abandoned religion; that is why I got him killed.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥