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mahabharat 7.181.20: फिर कोई साधारण मनुष्य उसकी ओर देख भी कैसे सकता था? उसकी मुट्ठियाँ बहुत मज़बूत थीं। वह शस्त्र विद्या में निपुण था और दिन-रात बाण चलाने का अभ्यास करता रहता था।   |   mahabharat अध्याय 7.181: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको जरासंध आदि धर्मद्रोहियोंके वध करनेका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.181.20 
किमु मानुषमात्रेण शक्य: स्यात् प्रतिवीक्षितुम्।
दृढमुष्टि: कृती नित्यमस्यमानो दिवानिशम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
फिर कोई साधारण मनुष्य उसकी ओर देख भी कैसे सकता था? उसकी मुट्ठियाँ बहुत मज़बूत थीं। वह शस्त्र विद्या में निपुण था और दिन-रात बाण चलाने का अभ्यास करता रहता था।
 
Then how could any mere human being even look at him? His fists were strong. He was an expert in the art of weapons and always practised shooting arrows day and night.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)