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mahabharat 7.181.19: हे कुन्तीपुत्र! यदि एकलव्य का अंगूठा सुरक्षित होता तो देवता, दानव, राक्षस और सर्प मिलकर भी उसे युद्ध में नहीं हरा सकते थे॥19॥   |   mahabharat अध्याय 7.181: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको जरासंध आदि धर्मद्रोहियोंके वध करनेका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 181: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको जरासंध आदि धर्मद्रोहियोंके वध करनेका कारण बताना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  7.181.19 
एकलव्यं हि साङ्गुष्ठमशक्ता देवदानवा:।
सराक्षसोरगा: पार्थ विजेतुं युधि कर्हिचित्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! यदि एकलव्य का अंगूठा सुरक्षित होता तो देवता, दानव, राक्षस और सर्प मिलकर भी उसे युद्ध में नहीं हरा सकते थे॥19॥
 
O son of Kunti! If Eklavya's thumb had been safe then even the gods, demons, devils and serpents together could not have defeated him in battle.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)