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mahabharat 7.181.17: तुम्हारे लाभ के लिए ही द्रोणाचार्य ने गुणवान एकलव्य को अपना गुरु बनाया था और छल से उसका अंगूठा कटवा दिया था।   |   mahabharat अध्याय 7.181: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको जरासंध आदि धर्मद्रोहियोंके वध करनेका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 181: भगवान् श्रीकृष्णका अर्जुनको जरासंध आदि धर्मद्रोहियोंके वध करनेका कारण बताना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.181.17 
त्वद्धितार्थं च नैषादिरङ्गुष्ठेन वियोजित:।
द्रोणेनाचार्यकं कृत्वा छद्मना सत्यविक्रम:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारे लाभ के लिए ही द्रोणाचार्य ने गुणवान एकलव्य को अपना गुरु बनाया था और छल से उसका अंगूठा कटवा दिया था।
 
For your benefit only, Dronacharya had made the virtuous Eklavya his teacher and had deceitfully got his thumb cut off.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)