श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 179: घटोत्कचका घोर युद्ध तथा कर्णके द्वारा चलायी हुई इन्द्रप्रदत्त शक्तिसे उसका वध  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.179.25 
ततस्तस्यां विद्युत: प्रादुरास-
न्नुल्काश्चापि ज्वलिता: कौरवेन्द्र।
घोषश्चास्या: प्रादुरासीत् सुघोर:
सहस्रशो नदतां दुन्दुभीनाम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हे कौरवराज ! तत्पश्चात उसमें से बिजली प्रकट हुई और जलती हुई उल्काएँ गिरने लगीं। इसके साथ ही हजारों नगाड़ों के समान अत्यन्त भयानक शब्द होने लगा॥ 25॥
 
O King of Kauravas! Thereafter lightning appeared from it and burning meteors started falling. Along with this a very terrifying sound like the sound of thousands of drums started coming.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)