श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 179: घटोत्कचका घोर युद्ध तथा कर्णके द्वारा चलायी हुई इन्द्रप्रदत्त शक्तिसे उसका वध  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.179.24 
ततो मायां दारुणामन्तरिक्षे
घोरां भीमां विहितां राक्षसेन।
अपश्याम लोहिताभ्रप्रकाशां
देदीप्यन्तीमग्निशिखामिवोग्राम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् हमने आकाश में उस राक्षस द्वारा रची हुई एक भयंकर, भयानक और भयावह माया देखी। पहले वह लाल बादलों के रूप में प्रकट हुई और फिर भयंकर अग्नि की ज्वाला के समान प्रज्वलित होने लगी॥24॥
 
Thereafter we saw a terrible, dreadful and terrifying illusion created by that demon in the sky. First it appeared in the form of red clouds and then it started blazing like a terrible flame of fire.॥24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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