श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 178: दोनों सेनाओंमें परस्पर घोर युद्ध और घटोत्कचके द्वारा अलायुधका वध एवं दुर्योधनका पश्चात्ताप  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  7.178.40 
स तं दृष्ट्वा विनिहतं भीमसेनात्मजेन वै।
प्रतिज्ञां भीमसेनस्य पूर्णामेवाभ्यमन्यत॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
परन्तु जब उसने देखा कि अलायुध को भीमसेन के पुत्र घटोत्कच ने मार डाला है, तो उसने निश्चय कर लिया कि अब भीमसेन की प्रतिज्ञा अवश्य पूरी होगी।
 
But when he saw that Alayudha was killed by Ghatotkacha, son of Bhimasena, he took it for sure that now Bhimasena's vow would certainly be fulfilled.
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि घटोत्कचवधपर्वणि रात्रियुद्धेऽलायुधवधेऽष्टसप्तत्यधिकशततमोऽध्याय: ॥ १७८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत घटोत्कचवधपर्वमें रात्रियुद्धके समय अलायुधका वधविषयक एक सौ अठहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७८॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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