श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 178: दोनों सेनाओंमें परस्पर घोर युद्ध और घटोत्कचके द्वारा अलायुधका वध एवं दुर्योधनका पश्चात्ताप  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.178.20 
सोऽभिवीक्ष्य हतां मायां मायावी माययैव हि।
अश्मवर्षं सुतुमुलं विससर्ज घटोत्कचे॥ २०॥
 
 
अनुवाद
माया द्वारा ही अपनी माया नष्ट हुई देखकर मायावी अलायुध ने घटोत्कच्छ पर भयंकर पत्थरों की वर्षा आरम्भ कर दी ॥20॥
 
Seeing his illusion destroyed by illusion itself, the illusive Alayudh started raining fierce stones on Ghatotkachha. 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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