श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 178: दोनों सेनाओंमें परस्पर घोर युद्ध और घटोत्कचके द्वारा अलायुधका वध एवं दुर्योधनका पश्चात्ताप  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.178.17 
स समास्थाय मायां तु ववर्ष रुधिरं बहु।
विद्युद्विभ्राजितं चासीत् तुमुलाभ्राकुलं नभ:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
माया का आश्रय लेकर उसने बहुत अधिक रक्त की वर्षा की। उस समय आकाश में घने बादल छा गए थे और बिजली चमक रही थी। 17.
 
Taking recourse to Maya, he rained a lot of blood. At that time, a thick cloud of clouds had gathered in the sky and lightning was flashing. 17.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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