श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 178: दोनों सेनाओंमें परस्पर घोर युद्ध और घटोत्कचके द्वारा अलायुधका वध एवं दुर्योधनका पश्चात्ताप  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.178.16 
स भग्नहयचक्राक्षाद् विशीर्णध्वजकूबरात्।
उत्पपात रथात् तूर्णं मायामास्थाय राक्षसीम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जिसके घोड़े, पहिये और धुरे नष्ट हो गए थे, तथा जिसकी ध्वजाएँ और घोड़े तितर-बितर हो गए थे, उस रथ से माया का आश्रय लेकर वह निहत्था राक्षस तुरंत ही उड़ गया॥16॥
 
Taking refuge in Maya, the unarmed demon immediately flew away from that chariot whose horses, wheels and axles were destroyed, and whose flags and horses were scattered. ॥16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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