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mahabharat 7.178.14: तत्पश्चात् युद्धभूमि में अग्नि के समान प्रज्वलित घटोत्कच ने सौ घंटियों से सुसज्जित तथा स्वर्ण से सुसज्जित अपनी गदा से उस पर आक्रमण किया।   |   mahabharat अध्याय 7.178: दोनों सेनाओंमें परस्पर घोर युद्ध और घटोत्कचके द्वारा अलायुधका वध एवं दुर्योधनका पश्चात्ताप   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.178.14 
ततो दीप्ताग्निसंकाशां शतघण्टामलंकृताम्।
चिक्षेप तस्मै समरे गदां काञ्चनभूषिताम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् युद्धभूमि में अग्नि के समान प्रज्वलित घटोत्कच ने सौ घंटियों से सुसज्जित तथा स्वर्ण से सुसज्जित अपनी गदा से उस पर आक्रमण किया।
 
Thereafter Ghatotkacha, blazing like a fire in the battlefield, attacked him with his mace, adorned with a hundred bells and decorated with gold.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)