vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 178: दोनों सेनाओंमें परस्पर घोर युद्ध और घटोत्कचके द्वारा अलायुधका वध एवं दुर्योधनका पश्चात्ताप
»
श्लोक 14
श्लोक
7.178.14
ततो दीप्ताग्निसंकाशां शतघण्टामलंकृताम्।
चिक्षेप तस्मै समरे गदां काञ्चनभूषिताम्॥ १४॥
अनुवाद
तत्पश्चात् युद्धभूमि में अग्नि के समान प्रज्वलित घटोत्कच ने सौ घंटियों से सुसज्जित तथा स्वर्ण से सुसज्जित अपनी गदा से उस पर आक्रमण किया।
Thereafter Ghatotkacha, blazing like a fire in the battlefield, attacked him with his mace, adorned with a hundred bells and decorated with gold.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas