श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम  »  श्लोक 76-77h
 
 
श्लोक  7.175.76-77h 
अथ संधाय वायव्यमस्त्रमस्त्रविदां वर:॥ ७६॥
व्यधमत् कालमेघं तं कर्णो वैकर्तनो वृष:।
 
 
अनुवाद
तब शस्त्रविद्या के पारंगत महारथी कर्ण ने, जिसने वैकर्तन का दान दिया था, वायव्यास्त्र का निशाना साधकर उस काले बादल को नष्ट कर दिया।
 
Then Karna, the best among the experts of weapons, who had given the gift of Vaikartana, aimed the Vayavyastra and destroyed that black cloud. 76 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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