श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.175.2 
कीदृशं चाभवद् रूपं तस्य घोरस्य रक्षस:।
रथश्च कीदृशस्तस्य हया: सर्वायुधानि च॥ २॥
 
 
अनुवाद
उस समय उस भयंकर राक्षस का स्वरूप कैसा था? उसका रथ कैसा था? उसके घोड़े और उसके समस्त अस्त्र-शस्त्र कैसे थे?॥2॥
 
What was the appearance of that fearsome demon at that time? What was his chariot like? What were his horses and all his weapons like?॥2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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