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श्लोक 7.175.114  |
स भग्नमायो हैडिम्बि: कर्णं वैकर्तनं तदा।
एष ते विदधे मृत्युमित्युक्त्वान्तरधीयत॥ ११४॥ |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार अपनी माया नष्ट हो जाने पर हिडिम्बा के पुत्र घटोत्कच ने सूर्यपुत्र कर्ण से कहा, ‘यह लो। मैं अब तुम्हारी मृत्यु की तैयारी कर रहा हूँ।’ इतना कहकर वह वहीं अन्तर्धान हो गया। |
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| After his illusion was destroyed in this manner, Ghatotkacha, the son of Hidimba, said to Karna, the son of the Sun, 'Take this. I am now preparing for your death.' Saying so, he disappeared right there. |
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इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि घटोत्कचवधपर्वणि रात्रियुद्धे कर्णघटोत्कचयुद्धे पञ्चसप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १७५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत घटोत्कचवधपर्वमें रात्रियुद्धके प्रसंगमें कर्ण और घटोत्कचका युद्धविषयक एक सौ पचहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७५॥
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