श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  7.175.11-12h 
किंकिणीशतनिर्घोषं रक्तध्वजपताकिनम्॥ ११॥
ऋक्षचर्मावनद्धाङ्गं नल्वमात्रं महारथम्।
 
 
अनुवाद
उसके रथ में सैकड़ों छोटी-छोटी घंटियों की मधुर ध्वनि गूंज रही थी। उस पर एक लाल झंडा लहरा रहा था। उस रथ के सभी भाग भालू की खाल से ढके हुए थे। वह विशाल रथ चारों ओर से चार सौ फुट लंबा था।
 
There was a sweet sound of hundreds of small bells in his chariot. A red flag was fluttering on it. All the parts of that chariot were covered with bear skin. That huge chariot was four hundred feet long on all sides. 11 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)