श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 175: घटोत्कच और उसके रथ आदिके स्वरूपका वर्णन तथा कर्ण और घटोत्कचका घोर संग्राम  »  श्लोक 109-110
 
 
श्लोक  7.175.109-110 
राक्षसाश्च पिशाचाश्च यातुधानास्तथैव च।
शालावृकाश्च बहवो वृकाश्च विकृतानना:॥ १०९॥
ते कर्णं क्षपयिष्यन्त: सर्वत: समुपाद्रवन्।
अथैनं वाग्भिरुग्राभिस्त्रासयांचक्रिरे तदा॥ ११०॥
 
 
अनुवाद
उस समय बहुत से राक्षस, पिशाच, प्रेत, कुत्ते और भेड़िये भयंकर मुख वाले कर्ण पर चारों ओर से आक्रमण करके उसे डसने लगे और अपनी भयंकर गर्जना से उसे भयभीत करने लगे।
 
At that time many demons, vampires, spirits, dogs and wolves with horrific faces attacked Karna from all sides to bite him and began to frighten him with their terrible roars.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)