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श्लोक 7.175.102  |
अशक्यं कर्तुमन्येन सर्वभूतेषु मानद।
यदकार्षीत् तदा कर्ण: संग्रामे भीमदर्शने॥ १०२॥ |
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| अनुवाद |
| हे दूसरों को सम्मान देने वाले राजन! उस घोर युद्ध में कर्ण ने जो कार्य किया, वह समस्त प्राणियों में कोई भी नहीं कर सकता था॥102॥ |
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| O King who gives respect to others! The deed that Karna did during that fierce battle, no one else among all living beings could have done that.॥ 102॥ |
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