श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  7.170.70 
भारद्वाजस्ततो गत्वा धृष्टद्युम्नरथं प्रति।
महद् युद्धं तदाऽऽसीत् तु द्रोणस्य निशि भारत।
धृष्टद्युम्नेन वीरेण पञ्चालैश्च सहाद्भुतम्॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् द्रोणाचार्य ने धृष्टद्युम्न के रथ पर आक्रमण किया। उस रात्रि में द्रोणाचार्य और वीर धृष्टद्युम्न तथा पांचालों के बीच बड़ा ही अद्भुत युद्ध हुआ। 70॥
 
India Thereafter Dronacharya attacked Dhrishtadyumna's chariot. That night, a great and wonderful battle took place between Dronacharya and the brave Dhrishtadyumna and the Panchalas. 70॥
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि घटोत्कचवधपर्वणि रात्रियुद्धे संकुलयुद्धे सप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १७०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत घटोत्कचवधपर्वमें रात्रियुद्धके अवसरपर संकुलयुद्धविषयक एक सौ सत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७०॥

 
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