श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  7.170.60 
यथा त्विह व्रजत्येष परलोकाय माधव:।
तथा कुरु महाराज सुनीत्या सुप्रयुक्तया॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! मधुवंशी सात्यकि जिस किसी भी उपाय से परलोक जा सकें, आप अच्छी नीति से ऐसा करने का प्रयत्न करें ॥60॥
 
"Maharaj! Whatever be the means by which this Satyaki of the Madhuvanshi clan can go to the other world, try to do so by a good policy that has been used well." ॥ 60॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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