vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण
»
श्लोक 55-56h
श्लोक
7.170.55-56h
सात्यकिं यदि हन्याम धृष्टद्युम्नं च पार्षतम्॥ ५५॥
असंशयं महाराज ध्रुवो नो विजयो भवेत्।
अनुवाद
महाराज! यदि हम सात्यकि और द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न को मार डालें, तो हमारी स्थायी विजय हो जाएगी, इसमें संशय नहीं है ॥55 1/2॥
Maharaj! If we kill Satyaki and Drupada's son Dhrishtadyumna, then we will have permanent victory, there is no doubt about it. ॥ 55 1/2॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd