श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण  »  श्लोक 53-54h
 
 
श्लोक  7.170.53-54h 
अयं मध्ये स्थितोऽस्माकं सात्यकि: सात्वतां वर:॥ ५३॥
इह चेल्लभ्यते लक्ष्यं कृत्स्नान् जेष्यामहे परान्।
 
 
अनुवाद
ये सात्वतशिरोमणि सात्यकि इस समय हमारे बीच में खड़े हैं। यदि हम उन्हें यहीं अपने बाणों का लक्ष्य बना सकें, तो निश्चय ही हम समस्त शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर सकेंगे।
 
This Satvatashiromani Satyaki is standing amongst us right now. If we can make him the target of our arrows here, then we will certainly be able to conquer all the enemies. 53 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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