vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण
»
श्लोक 51-52h
श्लोक
7.170.51-52h
शृणु दुन्दुभिनिर्घोषमर्जुनस्य रथं प्रति॥ ५१॥
निशीथे राजशार्दूल स्तनयित्नोरिवाम्बरे।
अनुवाद
नृपश्रेष्ठ! आज रात को अर्जुन के रथ के पास जो नगाड़े बज रहे हैं, उनकी ध्वनि आकाश में बादलों की गड़गड़ाहट के समान सुनो। 51 1/2॥
Nrupashrestha! Listen to the sound of drums being made near Arjuna's chariot this night, like the thunder of clouds in the sky. 51 1/2॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd