श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  7.170.38 
अस्त्रैरस्त्राणि संवार्य तेषां कर्णस्य वा विभो।
अविद्धॺत् सात्यकि: क्रुद्धो वृषसेनं स्तनान्तरे॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! इससे क्रोधित होकर सात्यकि ने अपने अस्त्रों से उन सभी योद्धाओं तथा कर्ण के अस्त्रों को नष्ट कर दिया और वृषसेन की छाती पर गहरा घाव कर दिया। 38.
 
Lord! Enraged by this, Satyaki warded off the weapons of all those warriors and Karna with his weapons and inflicted a deep wound on Vrishasena's chest. 38.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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