श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  7.170.35 
विपाठकर्णिनाराचैर्वत्सदन्तै: क्षुरैरपि।
कर्ण: शरशतैश्चापि शैनेयं प्रत्यविध्यत॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
कर्ण ने शिनि के पौत्र सात्यकि को विपथ, कर्णी, नाराच, वत्सदन्त, क्षुर तथा सैकड़ों बाणों से क्षत-विक्षत कर दिया।
 
Karna mutilated Shini's grandson Satyaki with Vipath, Karni, Narach, Vatsadant, Kshur and hundreds of arrows.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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