श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 170: धृष्टद्युम्न और द्रोणाचार्यका युद्ध, धृष्टद्युम्नद्वारा द्रुमसेनका वध, सात्यकि और कर्णका युद्ध, कर्णकी दुर्योधनको सलाह तथा शकुनिका पाण्डव-सेनापर आक्रमण  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  7.170.29 
एतस्मिन्नेव काले तु दाशार्हो विकिरन् शरान्।
धृष्टद्युम्नं पराक्रान्तं सात्यकि: प्रत्यपद्यत॥ २९॥
 
 
अनुवाद
इसी समय दशरथ वंश के रत्न सात्यकि महाबली धृष्टद्युम्न पर बाणों की वर्षा करते हुए वहाँ आये।
 
At this time Satyaki, the jewel of the Dasharha clan, arrived there showering arrows on the mighty Dhrishtadyumna.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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