श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 17: सुशर्मा आदि संशप्तक वीरोंकी प्रतिज्ञा तथा अर्जुनका युद्धके लिये उनके निकट जाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.17.15 
भवतश्च प्रियं यत् स्यादस्माकं च यशस्करम्।
वयमेनं हनिष्यामो निकृष्यायोधनाद् बहि:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
इससे न केवल वे तुम्हारे प्रिय बनेंगे, अपितु हमारी कीर्ति भी बढ़ेगी। हम उन्हें युद्धभूमि से घसीटकर मार डालेंगे॥15॥
 
‘Not only will that endear you to them, but it will also enhance our fame. We will drag them out of the battlefield and kill them.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)