vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 17: सुशर्मा आदि संशप्तक वीरोंकी प्रतिज्ञा तथा अर्जुनका युद्धके लिये उनके निकट जाना
»
श्लोक 15
श्लोक
7.17.15
भवतश्च प्रियं यत् स्यादस्माकं च यशस्करम्।
वयमेनं हनिष्यामो निकृष्यायोधनाद् बहि:॥ १५॥
अनुवाद
इससे न केवल वे तुम्हारे प्रिय बनेंगे, अपितु हमारी कीर्ति भी बढ़ेगी। हम उन्हें युद्धभूमि से घसीटकर मार डालेंगे॥15॥
‘Not only will that endear you to them, but it will also enhance our fame. We will drag them out of the battlefield and kill them.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×