Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.169.42-43h: महाराज! रथों, हाथियों और घोड़ों पर जलती हुई मशालें आकाश से गिरती हुई विशाल उल्काओं के समान प्रतीत हो रही थीं।   |   mahabharat अध्याय 7.169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध  »  श्लोक 42-43h
 
 
श्लोक  7.169.42-43h 
दीप्यमाना: प्रदीपाश्च रथवारणवाजिषु॥ ४२॥
अदृश्यन्त महाराज महोल्का इव खाच्च्युता:।
 
 
अनुवाद
महाराज! रथों, हाथियों और घोड़ों पर जलती हुई मशालें आकाश से गिरती हुई विशाल उल्काओं के समान प्रतीत हो रही थीं।
 
Maharaj! The burning torches on the chariots, elephants and horses looked like huge meteors falling from the sky. 42 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)