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mahabharat 7.169.2: वे दोनों वीर पूर्वकाल से ही एक-दूसरे के प्रति शत्रुता रखते थे और एक-दूसरे को मार डालना चाहते थे; इसलिए उन्होंने एक-दूसरे को बाणों से घायल करना आरम्भ कर दिया, जिन्हें उन्होंने तब तक चलाया था जब तक उनके कान पूरी तरह से निकल नहीं गए॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 7.169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.169.2 
कृतवैरौ तु तौ वीरावन्योन्यवधकाङ्क्षिणौ।
शरै: पूर्णायतोत्सृष्टैरन्योन्यमभिजघ्नतु:॥ २॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों वीर पूर्वकाल से ही एक-दूसरे के प्रति शत्रुता रखते थे और एक-दूसरे को मार डालना चाहते थे; इसलिए उन्होंने एक-दूसरे को बाणों से घायल करना आरम्भ कर दिया, जिन्हें उन्होंने तब तक चलाया था जब तक उनके कान पूरी तरह से निकल नहीं गए॥ 2॥
 
Both the heroes had enmity with each other from the past and they wanted to kill each other; so they began to injure each other with arrows which they had shot till their ears were completely drawn out.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)