Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.169.15-16h: तत्पश्चात् पाण्डुपुत्र नकुल ने एक तीक्ष्ण एवं जलयुक्त बाण से शकुनि की दोनों जंघाओं को छेदकर उसे उसी प्रकार गिरा दिया, जैसे शिकारी द्वारा छेदे गए पंखयुक्त बाज को।   |   mahabharat अध्याय 7.169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  7.169.15-16h 
विशिखेन च तीक्ष्णेन पीतेन निशितेन च।
ऊरू निर्भिद्य चैकेन नकुल: पाण्डुनन्दन:॥ १५॥
श्येनं सपक्षं व्याधेन पातयामास तं तदा।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् पाण्डुपुत्र नकुल ने एक तीक्ष्ण एवं जलयुक्त बाण से शकुनि की दोनों जंघाओं को छेदकर उसे उसी प्रकार गिरा दिया, जैसे शिकारी द्वारा छेदे गए पंखयुक्त बाज को।
 
Thereafter, with a sharp and watery arrow, Nakula, son of Pandu, pierced both the thighs of Shakuni and made him fall like a winged eagle pierced by a hunter. 15 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)