श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 169: नकुलके द्वारा शकुनिकी पराजय तथा शिखण्डी और कृपाचार्यका घोर युद्ध  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.169.1 
संजय उवाच
नकुलं रभसं युद्धे निघ्नन्तं वाहिनीं तव।
अभ्ययात् सौबल: क्रुद्धस्तिष्ठ तिष्ठेति चाब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! भयंकर नकुल युद्ध में आपकी सेना का संहार कर रहे थे। उनका सामना करने के लिए सुबलपुत्र शकुनि क्रोधित होकर आये और बोले - 'अरे! खड़े रहो, खड़े रहो।'
 
Sanjaya says - O King! The fierce Nakul was destroying your army in the war. To face him, Subala's son Shakuni came in anger and said, 'Hey! Stand still, stand still'.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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